अलीगढ़ से एक बेहद संवेदनशील और रहस्यमय मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों तक को झकझोर दिया है। गाजियाबाद में तैनात रहे इंस्पेक्टर अनुज कुमार पिछले करीब पाँच महीनों से लापता बताए जा रहे हैं। लंबे समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग न मिलने से परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि तत्कालीन एसएसपी संजीव सुमन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था और उनकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। इसके बावजूद अब तक उनकी तलाश पूरी नहीं हो सकी है।
घटना ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब लापता इंस्पेक्टर की मां सुशीला देवी ने पूर्व एसएसपी पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके बेटे की हत्या करा दी गई है। उनका कहना है कि वह पिछले कई महीनों से अधिकारियों और थानों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, कोई ठोस जानकारी नहीं। एक मां के रूप में उनकी पीड़ा साफ झलकती है, जो अपने बेटे का पता लगाने और न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर है।
परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते गंभीरता से खोजबीन की जाती, तो शायद आज स्थिति अलग होती। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। स्थानीय स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक पुलिस अधिकारी का इतने लंबे समय तक लापता रहना कैसे संभव है।
वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग की तरफ से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे रहस्य और गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, ताकि न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके बल्कि पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी कायम रहे।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या लापता इंस्पेक्टर का कोई सुराग मिल पाता है या नहीं। फिलहाल एक मां की पुकार न्याय व्यवस्था से जवाब मांग रही है।
