मानसून आने के साथ ही देश भर के कई राज्यों में बारिश से मची तबाही से प्रभावित है. पर्वतीय इलाकों में सड़क धसी हैं तो कहीं सड़क पर पहाड़ों का मलबा आने से रास्ते बंद हो गए हैं. देश में कई नदियां उफान पर हैं और खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं.
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके हैं. यहां पूर्वोत्तर के असम समेत कई राज्यों पर बारिश कहर बनकर टूटी है. पहाड़ी राज्यों में मूसलाधार बारिश के चलते भारी तबाही हुई है. यहां भूस्खलन के चलते सड़कों पर पहाड़ों का मलबा गिर पड़ा है और बड़ी तादात में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. हालात ऐसे हैं कि पैदल आवाजाही भी अब रुक गई है.
पूर्वोत्तर के राज्य इन दिनों विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहे हैं. हालांकि असम में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का पानी कुछ जिलों में कम हुआ है जिसके चलते थोड़ी सी राहत देखी जा रही है. बताया जा रहा है कि यह राहत तात्कालिक है क्योंकि मौसम विभाग ने अगले चार से पांच दिन उत्तर पश्चिम से लेकर पूर्व और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी है.
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान और गुजरात में अत्यधिक बारिश हो रही है.
रेड अलर्ट के बीच उत्तराखंड में शनिवार से शुरू हुई भारी बारिश रविवार देर रात तक जारी रही. खासकर, गढ़वाल क्षेत्र में मूसलाधार बारिश लगातार जारी है. बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन से मलबा आया जिसके चलते राजमार्ग जाम हो गया.
उत्तराखंड सरकार ने फिलहाल चार धाम यात्रा सोमवार तक रोक दी है. गंगा, अलकनंदा समेत कई प्रमुख नदियां अपने उफान पर हैं. गंगा का जलस्तर बनने से ऋषिकेश, हरिद्वार और यूपी के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
बिहार की बात करें तो बीते 24 घंटे में मूसलाधार बारिश हुई है. कोसी, महानंदा, बागमती, गंडक और कमला समेत सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं. सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचा है. गोपालगंज में गंडक नदी के खतरे का निशान पार करने की जानकारी मिली है. बिहार के और कई इलाके में भी नदियां खतरे के निशान के आसपास हैं. छुटमुट नुकसान के अलावा किसी बड़े जानमाल के नुकसान की कोई जानकारी अभी तक नहीं मिली है.
