अपने पति संदीप सिंह के साथ नवनीत कौर (फाइल फोटो)
मेरठ के एक अस्पताल में कुछ ही घंटे के अंदर प्रसूता के दो ऑपरेशन कर डाले गये. आरोप है कि दूसरे ऑपरेशन के दौरान प्रसूता के पेट में सर्जिकल ब्लेड छोड़ दिया गया जिससे उसकी मौत हो गई. यह ब्लैड प्रसूता के अंतिम संस्कार के बाद ठंडी चिता से बरामद हुआ है. मृतक प्रसूता का परिवार बीते 6 दिन से मेरठ सीएमओ ऑफिस पर अनशन कर रहा है.
22 जून 2024 को मवाना के जीके कमल अस्पताल में रिठौरा खुर्द की नवनीत कौर को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया गया था. सर्जरी के बाद उसको बेटा पैदा हुआ लेकिन नवनीत की हालत बिगड़ती चली गई. कुछ घंटे बाद परिजनों से 6 यूनिट ब्लड की मांग की गई और बताया गया कि बच्चेदानी से ब्लीडिंग हो रही है. इसलिए सर्जरी करनी होगी. थोड़ी देर बाद दूसरी सर्जरी कर दी गई मगर इसके बाद भी नवनीत की तबीयत में कोई सुधार नहीं आया.
नवनीत के पति संदीप सिंह का आरोप है कि आईसीयू में ही उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी. ऑपरेशन के लिए बेहोशी के इंजैक्शन का असर पहले ही से था. यही बताकर नवनीत को गंभीर हालत में मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया. मेरठ में हायर सेंटर पर डॉक्टरों ने नवनीत को ब्रॉट डेड घोषित किया. परिजन जब फिर से जेके कमल अस्पताल पहुंचे तब तक अस्पताल का स्टाफ ताला डालकर फरार हो चुका था.
अंत्येष्टि के बाद परिवार जब ठंडी चिता से फूल चुनने पहुंचा तो उनको चिता में जला हुआ सर्जिकल ब्लेड बरामद हुआ. इस बात की शिकायत मेरठ के जिलाधिकारी और सीएमओ से भी की गई. मगर अफसर आरोपी अस्पताल पर अपनी कृपा बरसाते रहे. पुलिस को इस मामले में एक तहरीर दी गई थी लेकिन उस पर भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सका. 6 दिन पहले परिवार के लोग और नवनीत के पति ने मेरठ सीएमओ ऑफिस पर जाकर धरना और अनशन शुरू कर दिया.
मेरठ के सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि परिवार की शिकायत पर एक जांच शुरू की गई है. उसमें बयान दर्ज किए जाने का सिलसिला जारी है. परिवार की ओर से अभी तक कोई बयान दर्ज करने नहीं आया है. अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है. जेके अस्पताल के उस ऑपरेशन थिएटर पर भी ताला डाल दिया है जहां नवनीत के दो ऑपरेशन किए गए थे. परिवार की मांग है कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और उनकी गिरफ्तारी हो. परिवार ने अस्पताल को बंद करने की भी मांग की है.
2022 में मवाना का जीके कमल अस्पताल.. कमल अस्पताल के नाम से संचालित था. इस अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना से जुड़ा हुआ एक घोटाला हुआ था. इस घोटाले में मेरठ में प्रेक्टिस करने वाले एक सर्जन के नाम पर सर्जरी की गई. मरीज के आयुष्मान कार्ड से इस सर्जरी के बिलों का भुगतान किया गया. बाद में जब मरीज की हालत बिगड़ी तो वह असली डॉक्टर के पास अपना इलाज कराने पहुंचा.
पुरानी फाइल पर अपना नाम देखकर डॉक्टर को शक हुआ और उसने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की. जिसके बाद हुई जांच में प्रधानमंत्री के नाम से संचालित केन्द्र की योजना में अस्पताल के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था. कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग ने कमल अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया था. थोड़े दिन बाद इस अस्पताल को बदले हुए नाम से स्वास्थ्य विभाग ने फिर से लाइसेंस जारी कर दिया.
