‘एक देश एक चुनाव’ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी आज एक कदम आगे बढ़ गयी है. इस विषय को लेकर गठित हुए कोविंद समिति की रिपोर्ट पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज अपनी मंजूरी दे दी. आगामी संसद सत्र में अब इस रिपोर्ट को संसद में पेश किया जायेगा. 2019 में इस मुद्दे पर सबसे पहले पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपना विचार रखा था.
विधि मंत्रालय के 100 दिवसीय एजेंडे के हिस्से के रूप में कैबिनेट के सामने आज रिपोर्ट पेश की गई है जिसे केंद्रीय कैबिनेट की आज मंजूरी मिल गई है.
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक साथ चुनाव पर उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी. समिति ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 18,626 पन्नों वाली अपनी रिपोर्ट सौंपी. सरकार ने कहा कि समिति के गठन के बाद से हितधारकों, विशेषज्ञों और 191 दिनों के शोध कार्य के साथ व्यापक परामर्श के बाद रिपोर्ट को तैयार किया गया है.
कैबिनेट ने आज (18 सितंबर) एक साथ चुनाव कराने संबंधी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव संबंधी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव की सिफारिशें को दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा. पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किये जायेंगे. दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) किये जायेंगे. इसके तहत सभी चुनावों के लिए समान मतदाता सूची तैयार की जाएगी. इसके लिए पूरे देश में विस्तृत चर्चा शुरू की जाएगी. वहीं एक कार्यान्वयन समूह का भी गठन किया जाएगा.
कांग्रेस ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ काम नहीं कर सकता. खरगे ने कहा, ‘हम इसके साथ नहीं हैं. अगर हम चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र जीवित रहे तो हमें जब भी आवश्यकता हो चुनाव कराने की जरूरत है.’
इसके अलावा कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रस्ताव को गैर-व्यावहारिक बताया है. उन्होंने कहा, ‘यह इस देश में व्यावहारिक नहीं है. वे वर्तमान मुद्दों से ध्यान हटाना चाहते हैं.’
