मेरठ के एसएसपी ऑफिस पर इंसाफ मांगने आई सरिता की सांसे आखिरकार टूट गई. पति के जुल्म के खिलाफ वह उसे जेल भिजवाना चाहती थी लेकिन पुलिस में कार्रवाई से इनकार कर दिया. निराश सरिता अपने घर वापस नहीं लौट सकी और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया. सरिता का आरोप था कि उसके पति ने उसे तेजाब पिलाया है.
मोदीनगर के मखराया गांव की सरिता की शादी 5 फरवरी 2023 को मेरठ के माधवपुरम निवासी धर्मेंद्र के साथ हुई थी. यह शादी सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित हुई थी. शादी के बाद से ही धर्मेंद्र और उसका परिवार सरिता को दहेज के लिए प्रताड़ित करता था.
आरोप है कि 16 अगस्त 2024 की शाम को सरिता के पति धर्मेंद्र जेठ जेठानी ने मिलकर उसे तेजाब पिला दिया. उसकी हालत बिगड़ी तो पड़ोसियों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया. सरिता का ठीक से इलाज भी नहीं हो रहा था जिसके चलते उसकी हालत बिगड़ रही थी. एक दिन धर्मेंद्र और उसके परिजन सरिता को मायके के लाकर छोड़ गए.
बहन की आपबीती के आधार पर पुलिस ने सरिता के भाई की तहरीर पर ब्रह्मपुरी थाने में 13 सितंबर 2024 को पति, जेठ, जेठानी के खिलाफ बीएनएस की चार धाराओं में मुकदमा दर्ज किया. सरिता चाहती थी कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो लेकिन पुलिस आरोपियों को जेल भेजने के लिए तैयार नहीं थी. उसने पुलिस को यह भी बताया था कि उसे तेजाब पिलाया गया है लेकिन पुलिस ने इस तथ्य को झूठा मानकर मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया.
24 सितंबर को सरिता को ई रिक्शा में लादकर उसका भाई मेरठ के एसएसपी दफ्तर पहुंचा था. एसएसपी ने मदद का आश्वासन दिया और सरिता को वापस उसके घर भेज दिया. ब्रह्मपुरी इलाके में मेट्रो स्टेशन के नीचे ई-रिक्शा में चलते वक्त सरिता की अचानक तबियत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया. इंसाफ का इंतजार करते-करते सरिता की सांस थम गई. सीओ आफिस पर सरिता का शव रखकर जाम भी लगाया गया.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है उसमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है. इसलिए गिरफ्तारी नहीं हो सकती. एसएसपी मेरठ डॉ विपिन ताडा ने सरिता की मौत प्रकरण में ब्रह्मपुरी थाने पर लगे लापरवाही के आरोप के चलते एएसपी अंतरिक्ष जैन को जांच दी है. जांच में अगर थाने की लापरवाही पाई जाती है तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा.
सरिता के साथ जब मारपीट और प्रताड़ना हुई तो उसने ससुराल में रहते हुए 13 अगस्त को ब्रह्मपुरी थाने में पहली शिकायत की थी. दहेज उत्पीड़न का मामला होने की वजह से इस केस को परिवार परामर्श केंद्र में भेजा गया. इसके तीन दिन बाद ही ससुरालयों ने सरिता को तेजाब पिला दिया. 17 अगस्त को सरिता के मजिस्ट्रेटरियल बयान दर्ज हुए थे. इसके बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई करवाई दर्ज नहीं की.
सरिता का तीन अस्पतालों में इलाज हुआ और 28 अगस्त को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया था. सरिता अपने पति के साथ रहना चाह रही थी
