मेरठ के ईलम सिंह को दो महीनों से अपने जवान बेटे की तलाश है. उनका बेटा भूपेन्द्र 2 महीने पहले कांवड़ लेने गया था लेकिन लौटा नही. हरिद्वार से ब्रांद्रा तक ईलम सिंह अपने बेटे की गुमशुदगी के पोस्टर भी चिपका कर लौट आये है. इलाके की पुलिस अब उन्हें थाने से भगा देती है.
मेरठ से हरिद्वार जाने वाले नेशनल हाइवे से 3 किलोमीटर दूर एक गांव है.. मछरी. गांव का नौजवान भूपेन्द्र 28 जुलाई को गांव के ही दो और लड़को के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गया था. हरिद्वार तक ट्रेन से और फिर तीनों बस से नीलकंठ पहुंचे और महादेव के दर्शन किये. हर की पौड़ी में स्नान के बाद उन्होने जल लिया और ट्रेन से वापिसी करने के लिए स्टेशन पहुंच गये.
स्टेशन तक तीनों साथ थे लेकिन इसके बाद भूपेन्द्र अचानक गुम हो गया. साथियों को उम्मीद थी कि दौराला स्टेशन पर तीनों साथ उतरेगे. भीड़ बहुत थी इसलिए ट्रेन में खोजना मुश्किल था. गांव के दो साथी दौराला स्टेशन पर उतरे लेकिन भूपेन्द्र नही मिला. दोनो साथी पुरा महादेव जल चढ़ाने चले गये.
शिवरात्रि गुजर गयी. भूपेन्द्र घर नही लौटा. 2-3 दिन और गुजरे तो घरवालों ने खोजना शुरू किया. मेरठ गये, हरिद्वार गये. पुलिस से मिले, खोजबीन की. लेकिन भूपेन्द्र का कोई सुराग नही मिला. अपने इलाके के थाने गये और गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस के कहने पर पोस्टर छपवाये और फिर उन्हें हरिद्वार से लेकर मेरठ तक अलग-अलग जगहों पर चस्पा किया लेकिन भूपेन्द्र का कोई सुराग नही लगा.
किसी ने कहा कि जिस ट्रेन में भूपेन्द्र सवार था वह मुंबई के ब्रांद्रा स्टेशन तक जाती है. ईलम सिंह ने ढेर सारे पोस्टर छपवाये और ट्रेन में सवार होकर ब्रांद्रा तक गये. आते-जाते रास्ते में हर जगह अपने बेटे की गुमशुदगी के पोस्टर चिपकाकर आये. मगर बेटे का कोई सुराग नही मिल.
ईलम सिंह दर्जनों बार हरिद्वार और मेरठ पुलिस के अफसरों की चौखट पर फरियाद कर चुके है. पुलिस थानों में तो रोज का आना जाना है. जो मिलता है बेटे का पोस्टर सामने रखकर पता पूछते है. मगर अब थाने वाले उनके चेहरे से आजिज आ गये है. ईलम सिंह को अब थाने से भगा दिया जाता है.
पंडित, मौलवी से लेकर तांत्रिकों तक के पास बेटे की बरामदगी की उम्मीद में चक्कर लगा चुके है. सब कहते है आयेगा, कब यह पता नही.
