उत्तरप्रदेश के मेरठ में सेन्ट्रल मार्केट एक बार फिर से हाईकोर्ट के रडार पर है. हाईकोर्ट ने शहर के मशहूर जैना ज्वैलर्स के अवैध शॉपिंग काम्पलैक्स पर कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार के आवास आयुक्त को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने एक महीने का समय देते हुए कहा कि आवास आयुक्त बलकार सिंह जैना ज्वैलर्स के खिलाफ की गयी कार्रवाई को कोर्ट के सामने रखे.
मेरठ में पिछले दिनों सुप्रीमकोर्ट के आदेश से सेन्ट्रल मार्केट का कॉम्पलेक्स 661/6 को ध्वस्त किया गया था. इसी मार्केट में पिछले 3 बरसों में आवास विकास के भ्रष्ट अफसरों ने एप्रूव्ड नक्शे के विरूद्ध जैना ज्वैलर्स ने शॉपिंग काम्पलेक्स का निर्माण कराया. स्थानीय व्यापारी शिकायत करते रहे मगर आवास विकास के अफसरों के कानों पर जूं तक नही रेंगी.

सितंबर-2025 के आखिरी सप्ताह में नवरात्र शुभारंभ के मौके पर इस काम्पलैक्स में जैना ज्वैलर्स ने अपने ज्वैलरी शोरूम की शुरूआत की थी. शोरूम के उद्घाटन के लिए बीजेपी सांसद हेमामालिनी यहां पहुंची थी. इस दौरान भी आवास विकास के एसई राजीव कुमार और एक्सईएन आफताब अहमद जैना ज्वैलर्स के कारगुजारियों पर पर्दा डाले रहे. दलील दी गयी कि अवैध निर्माण को शासन के नये नियमों के तरह शमन किया गया है.
दिसंबर-2024 में सुप्रीमकोर्ट ने अवैध सेन्ट्रल मार्केट में बने कमर्शियल निर्माणों को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था. केस में पार्टी रहे 661/6 के मालिकाना हक वाले पक्षकारों के काम्पलेक्स के ध्वस्तीकरण आदेश भी दिये गये थे. करीब 10 महीने का वक्त आवास विकास के अफसरों ने कागजी घोड़े दौड़ाते हुए निकाल दिया.
इसके बाद मामले में पक्षकार आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आवास विकास अफसरों के खिलाफ कोर्ट में अवमानना याचिका योजित की जिस पर सुप्रीमकोर्ट ने परिषद् के अफसरों, राज्य सरकार और मेरठ के डीएम, एसएसपी समेत कई अफसरों से जबाब मांगा था.

जैना ज्वैलर्स के अवैध निर्माण मामले में भी लोकेश खुराना ने आवास विकास के अफसरों को सुप्रीमकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आगाह किया. मगर आवास विकास के अफसर अपना भ्रष्टाचार दबाने के प्रयास करते रहे और लोकेश खुराना को झूठी जानकारियां देते रहे. शोरूम के उद्घाटन के वक्त भी अफसरों ने उल्टे लोकेश खुराना से विवादित इमारत के व्यवसायिक शोरूम होने के सबूत मांगे.
सुप्रीमकोर्ट में अवमानना योजित होने के बाद आवास विकास के अफसरों को अपनी गर्दन फंसी नजर आयी और फिर जैना ज्वैलर्स को नोटिस पर नोटिस जारी किये गये. मगर कार्रवाई की प्रक्रिया में अफसरों ने अवैध काम्पलेक्स की सीलिंग नही की. उल्टे शोरूम मालिक को बचने और कोर्ट को गुमराह करने का रास्ते बताते हुए काम्पलेक्स पर आवास का बोर्ड जरूर लगवा दिया.
दिलचस्प बात यह है कि “आवास का बोर्ड” लगे इस कॉम्पलेक्स की पॉपुलर बनाने के लिए पूरे शहर में बड़े-बड़े होर्डिग्स लगाकर यह बताया जा रहा है कि यही गोल्डन बिल्डिंग जैना ज्वैलर्स की नयी ब्रांच है. हेमामालिनी की आमद पर शोरूम के उद्घाटन की तस्वीरें और वीडियो भी जैना ज्वैलर्स ने अखबार और सोशलमीडिया के माध्यम से खूब वायरल की थी.
मगर अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आवास आयुक्त की गर्दन अवमानना की कार्रवाई में फंसती हुई नजर आ रही है. जाहिर है कि स्थानीय अफसर भी अब इस मामले पर गंभीरता दिखायेगे और उनकी मजबूरी होगी कि कोर्ट की तय तारीख से पहले विवादित शोरूम के खिलाफ कार्रवाई करे.
