आध्यात्मिक सत्संग करने वाले साकार विश्वहरि उर्फ भोले बाबा एटा के करीब बहादुर नगली गांव के रहने वाले हैं. उनका गांव अब कासगंज जनपद के पटियाली कस्बे के अन्तर्गत आता है. उनकी शुरुआती पढ़ाई एटा में हुई. वह उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही रहे और स्थानीय खुफिया इकाई में पोस्टिंग के दौरान 18 साल तक नौकरी की.
90 के दशक में उन्होंने वीआरएस ले लिया और अपने ही गांव में झोपड़ी बनाकर रहने लगे. उन्होंने अपना नाम नारायण से बदलकर नारायण साकार विश्वहरि उर्फ भोले बाबा रख लिया. उनकी पत्नी भी उनके साथ आध्यात्मिक जीवन जीने लगी और सत्संग समागम में उनके साथ ही रहती हैं. वह धार्मिक संतों की तरह पोशाक धारण नहीं करते. वह सफेद रंग के सूट, पैंट-शर्ट और कुर्ता-पजामा पहनकर सत्संग करने हैं.

साकार विश्वहरि का दावा है कि उन्हें नौकरी छोड़ने के बाद भगवान से साक्षात्कार हुआ. तब उन्हें पता चला कि यह शरीर परमात्मा का अंश है और उन्होंने अपना जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया. साकार विश्वहरि उर्फ भोले बाबा जाटव जाति से हैं. उनके अनुयाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में है. एससी,एसटी और ओबीसी जातियों में उनके फॉलोअर्स की संख्या बहुत लंबी है. मुस्लिम समाज में भी उनके फॉलोअर्स मिलते हैं. भोलेबाबा सोशल मीडिया पर भी एक्टिव है. उनके समागम के दौरान भक्तों की संख्या लाखों में होती है.
भक्तों की संख्या को व्यवस्थित करने के लिए समागम के दौरान भोले बाबा खुद की आर्मी संचालित करते है. उनकी आर्मी काले रंग के कपड़े पहनती है और उन्हें सेवादार कहा जाता है. यह सेवादार श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने के अलावा पानी का इंतजाम करते है. आर्मी ट्रैफिक व्यवस्था में भी मदद करती हैं.
बहादुर नगली गांव में भोलेबाबा का आश्रम है जहां दरबार लगता है. दरबार के दौरान और सत्संग में जो भी भक्त पहुंचता है उसे पानी बांटा जाता है. बाबा के अनुयाई मानते हैं कि इस पानी को पीने से उनकी दिक्कतें हल हो जाती हैं. दरबार के दौरान हैंडपंप का पानी पीने के लिए लंबी-लंबी लाइन भी लगती हैं.

भोलेबाबा के सत्संगों का विवादों से भी वास्ता रहा है. मई-2022 में, जब पूरी दुनिया कोरोना के खतरे से जूझ रही थी, फर्रुखाबाद में भोलेबाबा ने सत्संग का आयोजन किया. इस सत्संग में केवल 50 लोगों के शामिल होने की सरकारी अनुमति मिली थी लेकिन कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सत्संग में 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए. इस दौरान बहुत से लोगों को कोरोना संक्रमण भी हुआ था.
हाथरस के सत्संग का आज से शुभारंभ किया गया था. 4 जुलाई से 11 जुलाई तक भोले बाबा का अगला कार्यक्रम आगरा में था. ग्वालियर रोड पर नगला केसरी में इस कार्यक्रम के आयोजन की पूरी तैयारी हो चुकी है और बाकायदा इसके पोस्टर भी लग चुके हैं. 4 जुलाई से भोले बाबा को वहां भी सत्संग की शुरूआत करनी थी.
