हाथरस सत्संग कांड को हुए 24 घंटे का वक्त बीत चुका है. मौके पर जिले से लेकर राज्य के आला अधिकारी और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरा कर चुके हैं. बावजूद इसके अभी केवल जांच और बयानों का दौर जारी है. मुख्यमंत्री ने इस मामले में एडीजी आगरा की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की है. मुख्यमंत्री का मानना है कि यह घटना हादसा या फिर साजिश भी हो सकती है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज करीब 11:30 बजे हाथरस पहुंचे. हाथरस के जिला अस्पताल में उन्होंने सत्संग में हुई भगदड़ में घायल लोगों से मुलाकात की. उनका हाल-चाल जाना और डॉक्टर्स को बेहतर इलाज के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने 12:30 बजे प्रेस वार्ता की और कहा कि जो भी जिम्मेदार होगा उसको कड़ी सजा मिलेगी. मुख्यमंत्री ने बताया की घटना की जांच के लिए एडीजी आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में एक एसआईटी गठित की गई है.
सीएम ने कहा कि हमने तय किया है कि इस मामले की जुडीशियल इन्क्वारी भी कराई जायेगी जो हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में होगी.
एसआईटी बाकी पहलुओं के अलावा इस बिंदु पर भी जांच करेगी कि कहीं यह हादसा साजिश तो नहीं था. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना में जिन 121 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है वह उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी जुड़े हुए थे.

मुख्यमंत्री ने कहा- “इस कार्यक्रम में जो सज्जन अपना उपदेश देने आए थे उनकी कथा संपन्न होने के बाद उनके मंच से उतरने पर उन्हें छूने के लिए महिलाओं का एक दल आगे बढ़ा तभी उनके पीछे एक भीड़ भी गई. इसी दौरान वे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगे. सेवादार भी लोगों को धक्का देते रहे जिसके कारण यह हादसा हुआ.
अभी सवाल है बाकी, एक्शन भी नही हुआ-
हाथरस सत्संग में मची भगदड़ की घटना को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका कि इस मामले में किसकी लापरवाही है. सिस्टम में वह कौन है जिसने भीड़ का आंकलन किए बिना इतना बड़े आयोजन के लिए अनुमति दे दी.
क्या इस आयोजन के लिए तैनात की गई तैयारियां मुकम्मल थी. मौके पर डॉक्टर, एंबुलेंस और इलाज की सुविधा आखिर क्यों नहीं रखी गई. ट्रैफिक को लेकर जब पर्याप्त मात्रा में ट्रैफिककर्मी और अधिकारी तैनात थे तो फिर अफरा-तफरी क्यों मची. पंडाल में होने वाले कार्यक्रम का बिंदुवार आंकलन करते समय अधिकारियों ने इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा कि “चरण रज” कार्यक्रम के दौरान भीड़ का दबाव एक और बढ़ सकता है. क्या इस कार्यक्रम में भीड़ नियंत्रित करने के लिए कोई रणनीति तैयार की गई थी?
121 मौतों के बाद अभी सिर्फ और सिर्फ जांच, एसआईटी और बयानबाजी का सिलसिला जारी है और मुख्यमंत्री लखनऊ लौट गये है.
