उत्तराखंड से चलकर देश के बाकी राज्यों तक जाने वाली विशाल कावड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होगी. इस यात्रा का उद्गम स्थल गोमुख से लेकर ऋषिकेश और हरिद्वार तक रहता है. अबकी बार करीब 4 करोड़ का शिवभक्त कांवड़िए इस कावड़ यात्रा में हिस्सा लेंगे.
यह कावड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होगी. शुरुआत में मध्य प्रदेश, राजस्थान, बुंदेलखंड, मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के कांवड़िए कांवड़ लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश से गुजरते हैं. करीब 27 जुलाई के बाद हरियाणा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से आने वाले कांवड़िए अपनी कावड़ों में गंगाजल लेकर शिवालयों तक जाएंगे. पश्चिम उत्तर प्रदेश की यह कावड़ यात्रा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है.
कावड़ यात्रा की सुरक्षा और इसे सहज बनाने के लिए कई दिनों से उत्तर प्रदेश उत्तराखंड समेत कई राज्यों के अफसर माथापच्ची कर रहे थे. शनिवार 7 जुलाई को मेरठ में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी चार राज्यों के अफसरों के साथ ट्रैफिक और सुरक्षा के मुद्दे को लेकर मंथन करने बैठे. इस बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 मंडलों के अफसर भी मौजूद रहे.
उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि कावड़ यात्रा की निगरानी के लिए हवाई सर्वेक्षण जारी रहेगा. पिछले वर्षों की तरह इस बार भी कांवड़ियों के ऊपर पुष्पवर्षा की जाएगी. कांवड़ियों के साथ चलने वाले डीजे का वॉल्यूम और ऊंचाई तय की गई है. इसका इंप्लीमेंटेशन कावड़ के उद्गम स्थल से किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी उत्तराखंड के अफसरों को दी गई है.
सीसीटीवी से पूरे मार्ग की निगरानी रखी जाएगी. निगरानी के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बनाए गए हैं. इन कंट्रोल रूम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारी मौजूद रहेंगे जो कांवड़ियों को इन मार्गों पर चलते हुए लाइव देख पाएंगे.
इस बार धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रवादी भावना कांवड़ियों के अंदर देखने को मिलेगी. इसके लिए पुलिस प्रशासन की ओर से कांवड़ियों को तिरंगे झंडे बांटे जाएंगे.
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि कांवरियों को अपने पास अनिवार्य रूप से एक आईडी रखनी होगी जिसमें उनके परिवारजनों का एक फोन नंबर भी रहेगा. यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है कि किसी भी तरह की इमरजेंसी में अगर कांवड़ियों के परिजनों तक पहुंचना हो तो अधिकारियों को आसानी रहे.
जहां तक मेडिकल सेवाओं की बात है, कावड़ मार्गों पर छोटे वाहनों की व्यवस्था की गई है. इन वाहनों में चिकित्सक से लेकर दवाएं तक मौजूद रहेगी. यह वाहन कांवड़ मार्ग पर मूवमेंट करेंगे.
दोनों राज्यों के ऑफिशल्स के लिए 8 कंट्रोल कैंप रखे गए हैं जहां संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारी मौजूद रहेंगे. इन कंट्रोल कैंप में पुलिस सेवा के अवसर भी मौजूद रहेंगे.
