हाथरस सत्संग कांड में 123 लोगों की मौत के बाद मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। राज्य सरकार ने इस मामले में एक्शन लेते हुए एसडीएम, सीओ, थानेदार, तहसीलदार और 2 चौकी इंचार्ज के खिलाफ कार्रवाई की है। इन सभी अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद सत्संग में प्रवचन करता सूरजपाल जाटव उर्फ साकार हरि उर्फ भोले बाबा के खिलाफ कार्रवाई की संभावना अब कम दिख रही है।
सोमवार शाम को एडीजी आगरा, कमिश्नर अलीगढ़ की संयुक्त कमेटी ने यह रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इस रिपोर्ट में 132 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। शासन में रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस घटना के लिए जिम्मेदार अफसर पर अब गाज गिरना तय माना जा रहा था। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक इस जांच रिपोर्ट में सूरजपाल जाटव उर्फ साकार हरि का नाम नहीं है।
सत्संग कांड में मौतों के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी गठित करके 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की थी। इस रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल हादसे के मूल कारण, लापरवाही और अनदेखियों को उजागर करना था। मौके पर राहत कार्यों और मुख्यमंत्री के दौरे की वजह से यह रिपोर्ट समय से दाखिल नहीं की जा सकी। इस रिपोर्ट में 132 लोगों की सूची तैयार की गई जिनमें बयान आदि की प्रक्रिया पूरी की गई है।
एसआईटी टीम ने दो बार घटनास्थल का दौरा किया। क्राइम सीन को घटना पर फिर से दोहराया गया। फॉरेंसिक, सर्विलांस आदि साक्ष्य भी एकत्रित किए गए हैं।
एसआईटी टीम ने जिन लोगों के बयान दर्ज किए हैं उनमें घटनास्थल पर तैनात एक पुलिस अधिकारी व अन्य सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, प्रारंभिक सूचना देने वाले कर्मचारी, एंबुलेंस कर्मी, डॉक्टर, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, किसान, चश्मदीद, घायल, तहसील व जिला स्तर के अधिकारी, डीएम, एसपी समेत कई वर्गों के लोगों के बयान लिए गए हैं। सत्संग के प्रमुख संबोधक साकार हरि उर्फ भोले बाबा की ओर से उनके अधिवक्ता के बयान भी इसी जांच रिपोर्ट में लिए गए हैं।
855 पन्नों की इस रिपोर्ट को सोमवार दोपहर तक तैयार किया गया जिसके बाद उसे गोपनीय तरीके से एक खास मैसेंजर के जरिए शासन तक भेजा गया।
