मेरठ की पैरा एथलीट प्रीति पाल को भारत सरकार अब अर्जुन अवार्ड से नवाजेगी. खेल पुरस्कारों की घोषणा में प्रीति पाल का नाम भी शामिल किया गया है. मुजफ्फरनगर के रामराज की मूल निवासी प्रीति पाल ने 2024 पेरिस ओलिंपक में ट्रैक ईवंट में 2 मैडल हासिल किये थे. वह विश्व चैम्पियनशिप में भी मैडल हासिल कर चुकी है.
पैरा एथलीट प्रीति पाल ने पेरिस ओलिंपक 2024 में मैडल जीतने के साथ नया इतिहास रचा था. भारतीय इतिहास में ओलिंपक के ट्रैक ईवंट में मैडल जीतने वाली वह पहली भारतीय पैरा एथलीट है. ओलिंपक में उन्होने 2 मैडल जीते है. इससे पहले पैरा वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी उन्होने मैडल जीता था.
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार उन्हें खेलों के प्रतिष्ठित पुरस्कार अर्जुन अवार्ड से नवाजने की घोषणा की है.

प्रीति पाल सरेब्रिल पाल्सी जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है. उनके पैर जमीन पर सीधे नही आते थे. मेरठ आकर जब उन्होने पढ़ाई शुरू की तो किसी ने उन्हें पैरा खेलों के बारे में बताया तो उन्होने खेलना शुरू किया. अपनी मेहनत के बूते उन्होने मेरठ के कैलाशप्रकाश स्टेडियम से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय मंच तक भारत का नाम रोशन किया है.
प्रीति के पिता गांव में दूध बेचने का काम करते है. उनके दादा किसी सरकारी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है. उनका परिवार कई दशक से मेरठ में निवास कर रहा है. प्रीति के माता-पिता ने उनके दादा के पास उन्हें पढ़ाई के लिए भेजा था. यहां जब उन्हें खेलों के बारे में जानकारी मिली तो सरकारी नौकरी हासिल करने का उनका सपना आकार लेने लगा. सरकारी नौकरी के लिए खेल की शुरूआत करने वाली प्रीति को ईश्वर ने छप्पर फाड़ कामयाबियां दी है.
प्रीति ने बताया कि सरकार उन्हें जल्द ही नौकरी भी देगी. उनकी नौकरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

प्रीति ने बताया कि ओलिंपक से लौटने पर घर आने से पहले वह देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिली थी. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री से मिलना उनका सपना था. पेरिस में पदक जीतने के बाद जब तक प्रधानमंत्री का फोन कॉल नही आया, वह अपने कोच से बार-बार फोन कॉल के बारे में पूछती रही थी. प्रधानमंत्री ने उनके हौसले की बड़ी तारीफ की.
प्रीति पाल अब देश के लिए और भी पदक जीतना चाहती है. वह कॉमनवेल्थ और ओलिंपक में अपने मैडल का रंग बदलना चाहती है. प्रीति के मुताबिक उन्हें अब कांस्य और रजत पदक नही, स्वर्ण पदक चाहिए. वह ढेरों मैडल जीतना चाहती है. उनकी ख्वाहिश है कि ढेरों पदक जीतने के बाद एक दिन उन्हें खेलरत्न पुरस्कार से नवाजा जाये.
