देश-विदेश में प्रसिद्ध किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों से अपनी जमीनें बचाने की अपील की है. उत्तरप्रदेश के मेरठ कलैक्ट्रेट में हुई महापंचायत में किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों की जमीनों का मालिक उद्योगपतियों की कंपनियों को बनाना चाहती है. पूरे देश के उद्योगपति अब किसानों की जमीनें खरीद रहे है. इस देश को बचाये रखना है तो किसानों को अपनी जमीनें बचाकर रखनी होगीं.
राकेश टिकैत ने ब्राजील की नजीर देते हुए कहा कि हमारी तरह उस देश की खेती और पशुपालन विश्व प्रसिद्ध था लेकिन सरकार की नीतियों की वजह से वहां के किसानों से जमीनें खरीद ली गयी. आज वहां किसानों की हालत मजदूरों जैसी है. भारत में भी सरकार इसी तरह की नीतियां लेकर आ रही है. किसानों से अनेक बहानों से जमीनें खरीदी जा रही है.

खेती, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन में बड़ी कंपनियां सक्रिय है. अगर आज नही चेते तो 30 साल बाद किसानों के पास जमीनें नही रहेगी.
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान जिंदा रहे इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़कर रखे. शहरों में पढ़ने वाले अपने बच्चों को वक्त-वक्त पर गांव लाइये. उन्हें अपने खेत दिखाइये. उन्हें सिखाइये कि खेतों में कैसे काम होता है. अगर बच्चों को गोबर से बदबू आना शुरू हो गयी तो समझ लीजिए कि उनके खून का किसान मर चुका है.
हमारी संततियों की जिम्मेदारी खेती-किसानी के साथ किसान की जमीनों को बचाकर रखने की है.
राकेश टिकैत ने किसानों से पेस्टीसाइट्स और फर्टीलाइजर्स का इस्तैमाल घटाने का आह्वान किया है. उन्होने कहा कि ज्यादा से ज्यादा पशुपालन कीजिए. पशुओं के गोबर की खाद बनाइये और उन्हें खेतों में डालिये. खेत सोना उगलेगें. सरकार किसानों की फर्टीलाइजर्स पर निर्भरता बढ़ाकर उन्हें पंगु बनाना चाहती है.
किसानों को बचाये रखने के आंदोलन लंबे समय तक चलेगें.

सरकार की राजनीतिक नीतियों और विपक्ष की भूमिका पर भी टिकैत ने सवाल खड़े किये. टिकैत ने कहा कि आज सिर्फ किसान ही देश में आंदोलन करता है. आंदोलनों में विपक्ष की भूमिका शून्य है. बीते कई वर्षो से किसी ने विपक्षी दलों पर आंसूगैस के गोले नही देखे होगे. हर मोर्चे पर सिर्फ किसान ही आंदोलन कर रहा है और लाठियां खा रहा है.
उन्होने यह भी कहा कि बीजेपी अब किसानों को जातियों में बांट रही है. जाटों के ऊपर बीते कुछेक सालों में बीजेपी ने नकेल कसी है. अब ब्राह्मण, ठाकुर और निशाने पर है. बीजेपी सरकार का इस्तैमाल करके जातिगत किसान संगठनों का भी निर्माण करा रही है. ऐसा इसलिए हो रहा है जिससे किसानों के बीच अस्तित्व की लड़ाई को कमजोर किया जा सके.
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने आज प्रदेश व्यापी आंदोलन किया था. मेरठ कलैक्ट्रेट पर हुई किसान महापंचायत में राकेश टिकैत पहुंचे थे.
राकेश टिकैत ने किसानों की सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व विभाग से जुड़ी किसानों की स्थानीय समस्याओं के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य और गन्ना किसानों के बकाया पैसे के भुगतान की मांगें दोहराई. भाकियू की मेरठ यूनिट ने इस महापंचायत का आयोजन किया था.
