Firki for makar sankranti. Makar sankranti is Indian kite Festival. It is also known as uttarayan. Firki is also called as Patang dori.
यूं तो पतंगबाजी का शौक ही चीन से आया हुआ है. एक जमाने तक पतंग की डोर मजबूत धागे हुआ करते थे. मगर अब पतंग के साथ अब चीन जानलेवा मांझा भी भारत में सप्लाई कर रहा है. खतरनाक चाइनीज मांझा तलवार की तेज धार की तरह काम करता है. पतंगबाजी का यह शौक अब राह चलते गले काट रहा है. पश्चिमी यूपी में इस मांझे से अब तक कई जानें भी जा चुकी है.

हाल की ही एक दर्दनाक घटना की बात करें तो वह 20 साल का नौजवान मेरठ का सुहैल था. टाइल्स लगाने का मिस्त्री सुहैल 6 जनवरी की दोपहर शहर में अपना मार्बल कटर रिपेयर कराने आया था. उसने शॉपिंग भी की और खुशी-खुशी अपने दोस्त के साथ बाइक पर सवाल होकर गांव लौट रहा था.
तभी शहर के तेजगढ़ी चौराहे पर उसकी गर्दन चाइनीज मांझे में उलझ गयी. सुहैल बाइक पर काबू नही कर सका. जब तक बाइक सड़क पर गिरी, तेज धार जैसा मांझा उसकी गर्दन को चीरते हुए निकल चुका था. लहुलुहान हुए सुहैल की मौके पर ही मौत हो गयी. कुछ राहगीर उसे उठाकर मेडीकल कालेज ले गये लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक तब तक सुहैल की सांसें नही बची थी. बाइक गिरने से सुहैल का साथी भी घायल हुआ.
सुहैल के पिता जान मुहम्मद बताते है कि जवान बेटा उनके रोजगार में मददगार था और उनके बुढ़ापे का सहारा था. अब वह काम संभालने लगा था और परिवार की आय का इकलौता साधन था. उसकी जिंदगी के साथ जान मुहम्मद की जीवन के सारे सहारे टूट गये. सोचा भी ना था कि राह चलते मांझा बेटे की जान ले लेगा.
7 जनवरी को मेरठ में फिर से मांझा से होने वाली दो घटनाऐं हुई. एक बेहद दर्दनाक घटना में चाइनीज मांझे से दो साल की मासूम बच्ची का गला कट गया. बच्ची के गले में 35 टांके आये है. अपनी ड्यूटी कर रहे होमगार्ड के गले में चाइनीज मांझे के फंदा ऐसा उलझा, उसके निकलने से पहले होमगार्ड लहूलुहान हो गया. होमगार्ड को भी कई टांके आये है.
यूं तो पूरा पश्चिमी यूपी पतंग के शौकीनों का इलाका माना जाता है लेकिन मेरठ शहर पतंगबाजों का बड़ा अड्डा है. यहां पतंगबाजी के मुकाबले ही लाखों रुपए के होते है. शर्ते लगती है और फिर पतंगबाजी होती है. इस होड़ में ऐसे-ऐसे चाइनीज मांझों का इस्तैमाल किया जाता है जो लोहे के पतले तार जैसे मजबूत और धारदार होते है.
शहर के खैरनगर और गोलाकुंआ में थोक और रिटेल मांझा बिक्री का बड़ा हब है मगर चाइनीज मांझा आपको किसी भी गली-मुहल्ले की रिटेल पतंग शॉप में आसानी से मिल जायेगा. हादसे होते है और फिर सरकार के फरमान के बाद पुलिस एक्टिव होती है, छापे मारती है, दो चार की गिरफ्तारी और धरपकड़ के बाद पुलिस चैन की चादर तानकर सो जाती है और शहर के लोग एक-एक करके चाइनीज मांझे से हलाक होते रहते है, मरते भी है.
चाइनीज मांझे से बीते बरसों में हुई घटनाऐं-
इस साल की शुरुआत में 6 जनवरी को सुहैल की मौत हुई. 7 जनवरी को 2 साल की बच्ची के मांझे में फंसने से 35 टांके आए. चाइनीज मांझे में फंसने से 7 जनवरी को होमगार्ड लहूलुहान हो गया.
2024 में भी ऐसी कई घटनाऐं हुई. शास्त्रीनगर में बाइक सवार की गर्दन कटी, 50 टांके आए. जाकिर कॉलोनी के पास बाइक सवार के मांझे में उलझने से उंगली कट गई. पीएल शर्मा रोड के बुजुर्ग के गले में मांझा फंसा, जबड़ा कटा. 2023 में चाइनीज मांझा से करीब 2 दर्जन लोग लहूलुहान हुए. 2022 में चाइनीज मांझे के शिकार की संख्या करीब डेढ़ दर्जन रही.
बीते कुछेक सालों में चाइनीज मांझे की धार पर करीब 8 लोगों की गर्दन हलाक हुई. बेकसूर मारे गये.
चाइनीज मांझे को बनाते वक्त साधारण धागे को कैमीकल लगाकर मजबूत किया जाता है. प्लास्टिक के तार जैसी मजबूती के बाद इस पर लोहे और कांच के बुरादे से धार रखी जाती है. यही वजह है कि बिना चाकू और कैंची के इस्तैमाल से इस तोड़ना मुमकिन नही.
मेरठ के एसएसपी डॉ विपिन ताडा बताते है कि मकर संक्रान्ति, 26 जनवरी और बसंत पंचवीं को शहर में पतंगबाजी का चलन है. ऐसे में लोग चाइनीज मांझे का इस्तैमाल करते है. सरकार ने इस मांझे के इस्तैमाल पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसलिए चाइनीज मांझा बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों ही कानून के दायरे में है. चाइनीज मांझे का इस्तैमाल अब अपराध है. बीते कुछेक दिनों में कई मुकदमें दर्ज करके चाइनीज मांझा विक्रेताओं को जेल भेजा गया है.
पुलिस रणनीति बनाकर चाइनीज मांझे के खिलाफ अभियान चला रही है. अगर कोई विक्रेता चाइनीज मांझे की बिक्री नही रोकता तो उसे गंभीर धाराओं में केस दर्ज करके जेल भेजा जायेगा. मेरठ के शहरियों से भी पुलिस की अपील है कि वह ऐसे मांझे के इस्तैमाल से बचे अन्यथा उन्हें भी जेल का मुंह देखना पड़ सकता है.
