उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े स्टांप घोटाले के आरोपी विशाल वर्मा को मेरठ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. विशाल वर्मा डेढ़ साल से फरार था और उसके ऊपर पुलिस ने ₹25 हजार का इनाम रखा हुआ था. विशाल वर्मा ने 2020 से 2023 के बीच 997 रजिस्ट्रियों में फर्जी स्टांप लगाकर सरकार और क्लाइंट्स को करोड़ों का चूना लगाया है.

2023 में एआईजी स्टांप मेरठ की जांच में पाया गया कि कोषागार से जारी किये गए एक ही नंबर के दो स्टांप दो जगह पर इस्तेमाल किये गए है. इस संबंध में जब वेरिफिकेशन हुआ तो मेरठ में 25-25 हजार के दो स्टांप फर्जी निकले. रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप के मिलने के बाद पूरे महकमें में हड़कंप मच गया और बीते 3 वर्षों की रजिस्ट्रियों की जांच शुरू हुई.
जांच में सन् 2000 से लेकर 2003 के बीच 997 ऐसी रजिस्ट्रियां मिली जिनमें 5000 से अधिक कीमत वाला स्टांप फर्जी निकला. यह सभी रजिस्ट्रियां मेरठ के विशाल वर्मा ने तैयार की थी. विशाल वर्मा मेरठ कलेक्ट्रेट में वकील है और उसका ऑफिस मंगल पांडे नगर में स्थित है.
स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने इन रजिस्ट्री में लगे फर्जी स्टांप को स्टांप शुल्क की चोरी माना और सभी पक्षकारों के विरुद्ध स्टांप चोरी का वाद शुरू करवा दिया गया. इतना ही नहीं, अपनी गर्दन बचाने के लिए स्टांप एवं पंजीयन विभाग के अफसरों ने सिविल लाइन थाने में भी मुकदमे दर्ज कराए और उनमें सिर्फ रजिस्ट्री के भूमि खरीदारों को आरोपी बनाया. दिलचस्प बात यह रही कि बरसों तक चलते रहे फर्जी स्टांप के इस खेल में कोषागार और रजिस्ट्री विभाग के अफसरो को साफ बचा दिया गया.
बीते कुछ एक महीनों से जिला प्रशासन और रजिस्ट्री विभाग के खिलाफ व्यापारियों ने मोर्चा खोल रखा था. इसी दरमियान एक मुकदमा विशाल वर्मा के खिलाफ एक पक्षकार ने कोर्ट के जरिए रजिस्टर्ड कराया तो पुलिस ने घोटाले की पूरी जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी. घोटाले की जांच के लिए बाकायदा एक जांच समिति भी गठित की गई. व्यापारियों की मांग थी कि विशाल वर्मा की गिरफ्तारी की जाए. शासन तक इस मामले में लिखापढ़ी हुई और कई मंत्रियों से भी व्यापारियों ने शिकायत की.
पिछले दिनों शासन के दबाव के बाद एक और मुकदमा विशाल वर्मा और उसके दो साथियों के खिलाफ दर्ज करवाया गया. विधानसभा की प्राक्कलन समिति के आदेश पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर यह केस दर्ज हुआ था. विशाल वर्मा के दो साथी इस मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजे गए. दोनों 400 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में बतौर गवाह दर्ज थे.
एसएसपी मेरठ की एक स्पेशल टीम लगातार विशाल वर्मा को तलाश कर रही थी. आज पुलिस टीम ने विशाल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल उसे क्राइम ब्रांच ऑफिस में रखकर पूछताछ की जा रही है. जिले के कई बड़े अफसर भी उससे पूछताछ करने पहुंच रहे हैं. विशाल वर्मा के ऊपर ₹25 हजार का इनाम था.
