हापुड़ में डीएम का “ईमानदार अभियान” एक लेखपाल की जान पर भारी पड़ा है. बिना सबूत सस्पैंड हुए लेखपाल ने बुधवार को सल्फास की गोलियां निगल ली थी. स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद लेखपाल को गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गयी.
कुछ दिन पहले हापुड़ डीएम अभिषेक पांडेय ने लेखपाल सुभाष मीणा को एक किसान की शिकायत पर निलंबित कर दिया था और उसके सहायक के खिलाफ केस दर्ज कराया था.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जांच करने के आदेश दिये है. मेरठ के मंडलायुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद और मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी इस मामले की जांच करेगें. लेखपाल संघ ने इस मामले में मुख्यमंत्री से जांच की मांग की थी.
जानकारी के मुताबिक 3 जून को जिलाधिकारी के जनसुनवाई कार्यक्रम में एक किसान ने लेखपाल के ऊपर आरोप लगाते हुए शिकायत की थी. लेखपाल सुभाष मीणा के खिलाफ खतौनी देने के बदले 500 रूपये की रिश्वत लेने के आरोप थे. डीएम ने मौके पर ही शिकायतकर्ता के बयान दर्ज कराये और लेखपाल सुभाष मीणा को निलंबित कर दिया.
इतना ही नही, लेखपाल के निजी सहायक के खिलाफ डीएम ने केस भी दर्ज कराया है. सस्पैंशन के बाद सुभाष मीणा बेहद तनाव और अवसाद में थे. विभाग में कोई उनकी मदद नही कर रहा था. शिकायतकर्ता मामले को निपटाने के लिए 5 लाख रूपये मांग रहा था.
10 जुलाई को तहसील में पहुंचे सुभाष मीणा ने सल्फास की गोलियां निगल ली. उनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. क्रिटिकल हालत में उन्हें गाजियाबाद के निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया जहां देर रात उनकी मृत्यु हो गयी.
