उत्तराखंड के जोशीमठ के बाद अब बागेश्वर भी दरक रहा है. धड़ल्ले से और बेहिसाब हो रहे खनन के चलते बागेश्वर के कांडा इलाके में मकानों में दरारें आयी है. इस इलाके के घरों और सड़कों पर अनगिनत दरारें आ गई हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले पर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है.
इलाके में करीब 1000 साल पुराना कालिका मंदिर भी अब खतरे के दायरे में है. इस मंदिर में खनन के चलते दरारें आ गई हैं. इलाके के लोगों की माने तो यहां सदियों से देवी की पूजा की जाती है और श्रद्धालु देवी की पूजा अर्चना के लिए दूर-दूर से आते हैं. हर रोज आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या यहां पर सैकड़ो में है. इस मंदिर से सैकड़ो लोगों को रोजगार भी मिलता है.
उत्तराखंड के कुछ मीडिया संगठनों ने बागेश्वर पर की गई खनन गतिविधियों की खबर में यह खुलासा किया है कि धड़ल्ले से हो रहे खनन के चलते बागेश्वर में जोशीमठ जैसे हालात हो गए हैं. यहां के सैकड़ो घरों में दरारें आ गई है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रमुख जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉक्टर अफरोज अहमद की पीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जवाब मांगा है.
मंत्रालय के अलावा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बागेश्वर के जिलाधिकारी को भी एनजीटी ने नोटिस जारी करके वास्तविक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है. इन सभी नोटिसों का जवाब पक्षकारों को एक सप्ताह के अंदर देना होगा.
जनता दरबार में लगातार आ रही शिकायतों के बाद बागेश्वर की जिलाधिकारी ने एक संयुक्त टीम को प्रभावित इलाके में भेजा है. कांडा क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान कन्याल गांव में भी टीम पहुंची और दरारें आने की खबरों का सत्यापन किया गया.
आपदा और भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील बागेश्वर जिले में खनन के चलते लोग पलायन को मजबूर हैं. इस जिले में खड़िया खनन के लिए सबसे अधिक खदानें स्वीकृत है. इन खदानों में अब मशीनों से खनन किया जा रहा है जिससे इलाके की आबादी खतरे की जद में आ गई है. कांडा- कन्याल और दुगनाकुरी तहसील के पंपों गांव में 20 परिवार घर छोड़ने को मजबूर है. लोगों के घरों, मंदिरों यहां तक कि सड़कों में भी दरारें आ गई है.
मशीनरी से हो रहे खनन की गतिविधियां तेज हुई है. इसके बाद आबादी में नुकसान बढ़ता चला जा रहा है. यहां दशकों से रह रहे लोगों को अब अपने घर खोने का खतरा बढ़ता जा रहा है.
बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल के मुताबिक उन्हें जनता दरबार में लोगों से दरारें आने की शिकायतें मिली है. इस पर प्रदूषण विभाग और तहसील की एक टीम को मौका मुआयना करने के लिए भेजा गया है. जहां तक कालिका मंदिर के मंदिर में खनन मंदिर में दरारें आने की बात है तो इस मंदिर के आसपास खनन कार्य 2 साल से बंद है.
जिले में 123 खड़िया की खदानें हैं जिनमें से 59 खदानों सक्रिय है. मानसून के चलते जुलाई से अभी खनन कार्य बंद है. अक्टूबर से खनन कार्य फिर से शुरू होगा.
